दिशाहीन
ऐसे भी कट सकता है जीवन
पर यह खेद रहेगा
किसी वृतांत पर मेरा नाम न होगा
चुप्पी सही पर समीर पर कोई संदेश न लिखा होगा
छू गया हूं किसी को ऐसा तो मुझे आभास नहीं
किसी परिप्लव पर मेरा चिन्ह भी न होगा
बीत जाएगा जीवन ऐसे ही
क्या यह भी कोई बड़ी बात न होगी ?
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अहम्
समय की कमी कभी नहीं थी,
बस क्षण में उलझा रहा मैं.
साथ समय के चला भी तो मैं
स्वप्न में लीन रहा मैं.
ऐसा नहीं कि मंज़िलों पर नज़र नहीं थी
बस सफर में उन्मत्त रहा मैं.
चरण धरा पर रख कर चला भी पर,
ख्यालों की उड़ान को रोक न सका.
स्वयं को पहचानने की
तृष्णा थी पर
बचपन को कभी नहीं गँवाया.
सार ज़िन्दगी का मिले या न मिले
कौतूहल को सदा बरकरार रखा.
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बासी इश्क
बरसों बाद मिले
कुछ बातें हुई प्यार भरी
कुछ शिकवे दूर हुए
और फिर चल दिए
बहुत टटोला दोनों ने इतिहास को
पर वह छोटी सी डोर
जो हमे बंधे रखी थी
वह कहीं नहीं मिली
जिनका चेहरा देखने को रोज तरसते थे
आज युगों बाद हमारे सामने है
पर दिल में अब वह कशिश नहीं
फासलों की बात नहीं
कुछ वह बदल गए
कुछ हम बदल गए
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